Home Knowledge गौतम बुद्ध ने इच्छा न रख्‍ाने को क्यों कहा था?

गौतम बुद्ध ने इच्छा न रख्‍ाने को क्यों कहा था?

गौतम बुद्ध ने इच्छा न रख्‍ाने को क्यों कहा – Gautama Buddha way wish-less

Gautama Buddha way wish-less

Gautama Buddha way wish

गौतम बुद्ध जी ने कहा था कि यदि आप इच्छारहित हो जाएं तो आपको आत्म ज्ञान की प्राप्ति होना तय है लेकिन हम अपने जीवन का हर काम इच्छा से करते हैं। तो फिर किस तरफ संकेत कर रहे थे गौतम बुद्ध?

आप किस वस्तु  की इच्छा करते हैं? क्या आप किसी ऐसी वस्तु की इच्छा कर सकते हैं, जिसे तुम  नहीं जानते? आप उसी चीज की इच्छा कर सकते हैं जिसको आप अच्छे से जानते हैं, या उसी चीज़ के थोड़े बेहतर रूप की इच्छा कर सकते है।
Gautama Buddha way wish-less
दूसरे शब्दों में, इच्छा करने से आप वह तो पा लेते हो  जो तुम  चाहते हो ,परन्तु  इसके साथ ही आप जीवन की दूसरी संभावनाओं को खत्म कर देते हैं। एक बार गौतम बुद्ध द्वारा यह कहने की गलती हो गयी की यदि आप इच्छा रहित हो जायेंगे तो आपको ज्ञान-प्राप्ति हो जाएगी। इस बात के कई प्रकार  के गलत अर्थ निकाले गए। बुद्ध जी का  मतलब यह था कि यदि एक बार आप कोई इच्छा करते हैं, तो आप लोग उसी चीज की इच्छा करते हैं जिसके बारे में आप लोग जानते हैं। ऐसे में कुछ नया घटित होने की संभावना बिलकुल खत्म हो जाती है। आपका पूरा जीवन ऐसी चीजों को पाने की कोशिश में निकल जाएगा जिन्हे आप जानते हैं। आपको जो भी बातें नहीं पता, वे आपके जीवन में कभी भी घटित होंगी ही नहीं।

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एक बड़ी विषय रहित इच्छा  – असीम तक ले जाएगी

ये इच्छा किसी विषय के साथ भी हो सकती है और बिना विषय के भी हो सकती है। यदि आप इसमें विषय को जोड़ दें तो विषय तो हमेशा वही से ही आता है जो पहले से मन में है।

आप एक बहुत बड़ी इच्छा जाग्रत करें, किसी वस्तु  के लिए नहीं, किसी व्यक्ति के लिए भी नहीं, बस एक बहुत ही बड़ी इच्छा। यह किया कैसे जाए, यदि आप यह जान जाएं तो आप पाएंगे कि जीवन में जो भी होना चाहिए, वह बिना आपकी सोचे के अपने आप हो रहा है। आपको उस सबके लिए न सोचने की और न ही मांगने की जरूरत होगी। भगवन आपके दास हो जाएंगे, वह आपके सभी काम करेंगे। आपको भगवान की पूजा करने की भी जरूरत नहीं है, और न ही उनसे कुछ मांगने की। आप लोगो  को बस एक बहुत बड़ी इच्छा पैदा करनी है, जिसका कोई भी विषय न हो, कोई भी दिशा न हो, बस वह एक विशाल ऊर्जा हो। क्योंकि आप लोग जिसे इच्छा कहते हैं, वह केवल ऊर्जा ही है। इस ऊर्जा को इधर-उधर की वस्तुओ के पीछे लगाकर आप इसे बेकार में बर्बाद कर रहे हैं। अगर आप लोग अपनी इच्छा को विषयरहित बना लें, एक इच्छा जो बहुत बड़ी और प्रबल हो, खुद तुम्हारे अस्तित्व से भी बड़ी, और किसी भी व्यक्ति या वस्तु के लिए न हो, तो आप लोग पाएंगे कि जीवन चमत्कारिक तरीके से घटित होने लगा है। जिन वस्तुओ की आप कल्पना भी नहीं करते थे, वे आपके जीवन में घटित होने लगेंगी, क्योंकि तब जीवन ऊर्जा अपने चरम पर होगी। यदि आप अपनी जीवन ऊर्जा को चरम पर रख सकते हैं, तो वो बेहद खूबसूरत चीजों को आकर्षित करने लगेगी। दूसरा कोई भी रास्ता नहीं है।

यदि आप अपना जीवन कुछ खास और सीमित लक्ष्यों के साथ में जी रहे हैं, तो इच्छा पैदा करने और उसको पूरा करने में कोई भी बुराई नहीं है। लेकिन यदि आपके जीवन का लक्ष्य उन सब चीजों से परे जाना है, जो अभी से आपको पता हैं, तो आप की  इच्छा विषय रहित होनी ही चाहिए।
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भाव स्पंदन कार्यक्रम में ऐसा ही होता है

हमारा एक कार्यकम है जिस का नाम है ‘भाव-स्पंदन।’ इस कार्यक्रम द्वारा  एक जबर्दस्त इच्छा पैदा की जाती है, एक इस तरह की इच्छा जो खुद आपसे भी बड़ी हो।

यह इच्छा न तो किसी वस्तु के लिए होती है, न किसी व्यक्ति के लिए। यह इतनी ज्यादा विशाल होती है कि इससे आप अपने शरीर से बाहर निकल जाना चाहते हैं। जब इस तरह का कुछ  होता है तो लोग अकारण ही परम आनंद में आ जाते हैं। उनके आनंद को देखकर आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि ऐसा कुछ भी इंसान की ज़िंदगी में घटित हो सकता है। मैं उस स्थिति को बताने हेतु कुछ भी कहूं तो वह पर्याप्त नहीं होगा। वह इतना जबर्दस्त भाव है कि कल्पना से भी परे है। सभी आपके भीतर मौजूद है, परन्तु लगातार बेकार में खर्च होने के कारण यह इकठ्ठा नहीं हो पाता। बस यदि तीन दिन तक आप अपने विचारों में कोई भी विषय न जोड़ें और आप केवल बैठे रहें, तो आप परम आनंद से भर जायेंगे। यदि आप इसी तरह से केवल दो दिन ही बैठ जाएं तो आपकी जीवन ऊर्जा एक ऐसे आनंद का अनुभव कराएगी कि आपको विश्वास नहीं होगा पायेगा कि किसी इंसान के जीवन में ऐसे अनुभव भी हो सकते हैं।

 

छोटी छोटी इच्छाओं को त्यागना होगा,

 इस जीवन ऊर्जा को छोटी ऊर्जा समझने की भूल न करे। यह इस सम्पूर्ण जगत का स्रोत है। शरीर की रचना अंदर से हुई है  इसलिए सम्पूर्ण संसार का स्रोत वहीं मौजूद है।

यदि आप लोग इसे बेकार न गंवाएं, यदि आप लोग इसे खास तरीके से संभाले रहें तो ये एक विस्फोटक हो सकती है, क्योंकि इसमें न केवल  एक ही शरीर की रचना करने की क्षमता है, अपितु ये पूरी सृष्टि की रचना कर सकती है। जैसे ही मनुष्य इसके संपर्क में आते हैं, उनका जीवन पूरी तरह से अलग हो जाता है। तो यदि आप भी इसके संपर्क में आना चाहते हैं तो आपको छोटी-मोटी वस्तुओ के पीछे न भागकर स्वयं अपनी जीवन ऊर्जा को ऐसे ही बेकार नहीं गंवाना चाहिए। इसी लिए यह  इच्छारहित होने की बात कही गई है और इसी संदर्भ में ब्रह्मचर्य और संन्यास की भी बात कही गयी है। दरअसल इन सभी बातों को पूरी तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। सभी कहते है कि इच्छाओ को छोड़ो, इसे करो, उसे करो। सही बात तो ये है कि आप अपनी इच्छाओ को छोड़ ही नहीं सकते, किन्तु आप इच्छा को विषय वस्तु से अलग ले जाकर इसे एक विशाल तरीके से विकसित जरूर  कर सकते हैं, इतना विशाल कि वह भौतिक सीमाओं में भी सीमित न रहे।

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