हैदराबाद मस्जिद ब्लास्ट केस में असीमानंद समेत सभी आरोपी बरी, जानिए पूरा मामला..

meeca masjid blast case aseemanand

meeca masjid blast case aseemanand: हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 11 साल पहले हुए बम ब्लास्ट मामले में NIA कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

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गृह मंत्रालय के पूर्व सचिव आरवीएस मणि ने कहा कि उन्हें पहले ही लग रहा था कि ऐसा होगा। सारे सबूतों को गढ़ा गया था, इस मामले में कोई हिंदू आतंकवाद नहीं था। मणि ने कहा कि जिन लोगों ने हमला किया उन्हें सुरक्षित कर लिया गया और निर्दोषों को फंसाया गया। अब उन लोगों की क्षतिपूर्ति कैसे होगी जिनको पीड़ित और बदनाम किया गया था।

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मस्जिद में मिले थे 3 और बम, पुलिस फायरिंग में गई थी 5 की जान

आपको बता दें कि इस धमाके में 9 लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे। मामले में 10 आरोपियों में से आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी जिसमें नबाकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल है। जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी.

उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर हैं और तीन लोग जेल में बंद हैं। एक आरोपी सुनील जोशी की जांच के दौरान हत्या कर दी गई थी।

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दो और आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंग्रा के बारे में मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया है कि उनकी भी हत्या कर दी गई है। ब्लास्ट मामले में सीबीआई ने सबसे पहले 2010 में असीमानंद को गिरफ्तार किया था लेकिन 2017 में उन्हें सशर्त जमानत मिल गई थी। उन्हें 2014 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में भी जमानत मिल गई थी।

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जानें क्या हुआ था ब्लास्ट वाले दिन

आपको बता दें कि जांच के दौरान असीमानंद ने कई बार अपने बयान बदले थे। उन्होंने पहले आरोपों को स्वीकार किया था और बाद में साजिश रचने की भूमिका में शामिल होने से इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि 18 मई 2007 को दोपहर 1 बजकर 27 मिनट पर प्रार्थना के दौरान धमाका हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, बाद में ये चारों लोग भी जिंदगी से जंग हार गये थे।

11 साल से चल रहा था केस

मस्जिद में धमाके के समय वहां 10 हजार लोग मौजूद थे। वहां दो जिंदा बम भी बरामद हुए थे जिसे हैदराबाद पुलिस ने निष्क्रिय कर दिया था। बाद में इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था लेकिन फिर यह मामला NIA के पास चला गया। एजेंसी ने 226 अभियोजन पक्ष के गवाहों को सूचीबद्ध किया था जिसमें से 64 बदल गए थे।

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